उत्तराखंड: बदरीनाथ धाम में नमाज पढ़ने का आरोप, विहिप और बजरंगदल ने पर्यटन मंत्री को सौंपा ज्ञापन

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सार

विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने जिला मुख्यालय पहुंचे पर्यटन मंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री से भेंट कर उन्हें ज्ञापन सौंपा।

बदरीनाथ धाम
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

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विश्व हिंदू परिषद और बजरंगदल ने बदरीनाथ धाम में एक समुदाय के लोगों की ओर से ईद की नमाज पढ़ने का आरोप लगाया है। परिषद के पदाधिकारियों ने इस संबंध में जिले के प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज को ज्ञापन सौंपकर मामले में जांच कर कार्रवाई की मांग की है। 

बुधवार को बदरीनाथ धाम में एक समुदाय के लोगों की ओर से समूह में ईद की नमाज पढ़ने की चर्चा तेजी से फैल गई। सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा होती रही। विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने जिला मुख्यालय पहुंचे पर्यटन मंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री से भेंट कर उन्हें ज्ञापन सौंपा।

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उन्होंने आरोप लगाया है कि बदरीनाथ धाम में ईद की नमाज पढ़ी गई। धाम में तीर्थ यात्रा पूरी तरह से बंद है। किसी को भी बदरीनाथ के दर्शन की अनुमति नहीं है, ऐसे में एक समुदाय के लोगों की ओर से कैसे धाम में ईद की नमाज पढ़ी जा रही है। इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।

विहिप के कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन में कहा है कि बदरीनाथ धाम हिंदुओं का पवित्र स्थल है। यहां पर जानबूझकर नमाज पढ़ी गई। इससे करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। बदरीनाथ धाम में मांस मदिरा और दूसरे धर्मों की गतिविधियों पर प्रतिबंध है। उन्होंने मांग की कि इस मामले की जल्द से जल्द जांच कराकर ऐसे कार्य करने वालों के खिलाफ कठोर कर्रवाई होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।

ज्ञापन देने वालों में विहिप के जिला अध्यक्ष राकेश चंद्र मैठाणी, हरि प्रसाद ममगाईं, देवी प्रसाद देवली, पवन राठौर, अतुल शाह, शंभु प्रसाद पंत, हर्ष प्रसाद चमोली, वेद प्रकाश भट्ट आदि शामिल थे।

चमोली के पुलिस अधीक्षक यशवंत सिंह चौहान ने कहा कि सोशल मीडिया पर बदरीनाथ में एक समुदाय के लोगों की ओर से नमाज पढ़ने के संदेश को भ्रामक तरीके से फैलाया जा रहा है। जो कि तथ्यहीन है। कहा गया कि बदरीनाथ में आस्था पथ नामक संस्था की पार्किंग का निर्माण कार्य चल रहा है।

जिसमें कार्य कर रहे एक समुदाय के लोगों द्वारा बुधवार को ईद के त्योहार के अवसर पर बंद कमरे में लाउडस्पीकर का प्रयोग किए बिना और मौलवी की अनुपस्थिति में व कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए नमाज पढ़ी गई। मामले की जांच की जा रही है।

इसके बाद देर रात इस मामले में कई लोगों पर मुकदमा भी दर्ज किया गया। 

धाम में नमाज पढ़ने के मामले में स्थानीय लोगों में गुस्सा, थाने में दिया ज्ञापन 
बदरीनाथ धाम में नमाज पढ़ने के मामले में स्थानीय लोगों ने बुधवार को बदरीनाथ थाने में एक ज्ञापन सौंपकर कहा गया कि बदरीनाथ धाम में इस पवित्र सावन माह में भी स्थानीय लोगों को न बदरीनाथ के दर्शनों की अनुमति दी जा रही है और न ही तप्तकुंड में स्नान करने दिया जा रहा है। लेकिन एक समुदाय विशेष के लोगों ने बुधवार को धाम में ईद की नमाज अदा की है।

यह बदरीनाथ के इतिहास में पहली बार हुआ है। यह एक निंदनीय घटना है। कहा गया कि मंदिर समिति के एक्ट नंबर 183 में स्पष्ट लिखा हुआ है कि बदरीनाथ धाम में बदरीनाथ की धार्मिक गतिविधियों के अलावा कोई भी अन्य गतिविधि न हो। 

विस्तार

विश्व हिंदू परिषद और बजरंगदल ने बदरीनाथ धाम में एक समुदाय के लोगों की ओर से ईद की नमाज पढ़ने का आरोप लगाया है। परिषद के पदाधिकारियों ने इस संबंध में जिले के प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज को ज्ञापन सौंपकर मामले में जांच कर कार्रवाई की मांग की है। 

बुधवार को बदरीनाथ धाम में एक समुदाय के लोगों की ओर से समूह में ईद की नमाज पढ़ने की चर्चा तेजी से फैल गई। सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा होती रही। विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने जिला मुख्यालय पहुंचे पर्यटन मंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री से भेंट कर उन्हें ज्ञापन सौंपा।

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उन्होंने आरोप लगाया है कि बदरीनाथ धाम में ईद की नमाज पढ़ी गई। धाम में तीर्थ यात्रा पूरी तरह से बंद है। किसी को भी बदरीनाथ के दर्शन की अनुमति नहीं है, ऐसे में एक समुदाय के लोगों की ओर से कैसे धाम में ईद की नमाज पढ़ी जा रही है। इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।

विहिप के कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन में कहा है कि बदरीनाथ धाम हिंदुओं का पवित्र स्थल है। यहां पर जानबूझकर नमाज पढ़ी गई। इससे करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। बदरीनाथ धाम में मांस मदिरा और दूसरे धर्मों की गतिविधियों पर प्रतिबंध है। उन्होंने मांग की कि इस मामले की जल्द से जल्द जांच कराकर ऐसे कार्य करने वालों के खिलाफ कठोर कर्रवाई होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।

ज्ञापन देने वालों में विहिप के जिला अध्यक्ष राकेश चंद्र मैठाणी, हरि प्रसाद ममगाईं, देवी प्रसाद देवली, पवन राठौर, अतुल शाह, शंभु प्रसाद पंत, हर्ष प्रसाद चमोली, वेद प्रकाश भट्ट आदि शामिल थे।


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