मानदेय तय नही करने पर दो अगस्त से आशा करेंगी कार्य बहिष्कार : कमला

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नैनीताल में शुक्रवार को अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करती जनपद भर की आशाएं।
नैनीताल में शुक्रवार को आशाओं को संबोधित करती प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल।

मानदेय तय नही करने पर दो अगस्त से आशा करेंगी कार्य बहिष्कार : कमला
नए नए तरीके अपनाकर आशाओं का शोषण कर रही सरकार : कैलाश पाण्डेय
आशाओं ने तल्लीताल डांट से लेकर डीएम कार्यालय तक निकाली विशाल रैली
अपनी मांगों को लेकर दिया डीएम के माध्यम से सीएम को भेजा आशाओं ने ज्ञापन
सीएन, नैनीताल।
आशाओं की समस्याओं का समाधान करने के लिए चल रहे आंदोलन के तहत नैनीताल में सैकड़ों की संख्या में पूरे जिले की आशा वर्कर्स ने ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के बैनर तले जोरदार प्रदर्शन कर तल्लीताल डाट में एकत्र होकर जिलाधिकारी कार्यालय तक जुलूस निकाला और उत्तराखंड राज्य के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि लंबे समय से काम के बदले मानदेय फिक्स करने की लड़ाई लड़ रही आशाओं को अगर अब भी 1 अगस्त तक सरकार ने आशाओं का आंगनबाड़ी की तरह मानदेय फिक्स नहीं किया और अन्य मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो 2 अगस्त से आशाएँ कार्य बहिष्कार पर मजबूर होंगी। गौरतलब है कि 23 जुलाई 2021 को आशाओं ने राज्य भर में ब्लॉकों में प्रदर्शन मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा था लेकिन सरकार ने एक नहीं सुनी, इससे पहले भी लगातार आशाएँ अपनी समस्याओं से भाजपा की राज्य सरकार को 2017 में सरकार बनने के बाद से ही अवगत करा रही हैं लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। ‘ऐक्टू’ से संबद्ध ‘उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन’ के व ‘सीटू’ से संबद्ध ‘उत्तराखण्ड आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री यूनियन’ के संयुक्त आह्वान पर 30 जुलाई, 2021 को पूरे राज्य के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जा रहा है। तल्लीताल डाट पर हुई संक्षिप्त सभा को संबोधित करते हुए यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने कहा कि, आशाओं के श्रम का लगातार शोषण खुद सरकार ही कर रही है लेकिन अब पानी सर के ऊपर से गुजर गया है इसलिए आशाएँ अब और बंधुवा मजदूरी नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि पूरे राज्य की आशाएँ एक साथ आंदोलन में हैं और इस बार आरपार की लड़ाई लड़ी जायेगी। आपने हक और सम्मान की लड़ाई लड़ रही आशाएँ एकता और संघर्ष के बल पर अवश्य जीतेंगी। यूनियन के प्रदेश महामंत्री डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, पहले से ही काम के बोझ तले दबी आशाओं को मोदी सरकार आने के बाद और भी ज्यादा क़िस्म के विभिन्न कामों में लगा दिया गया है लेकिन जब जब काम के एवज में मासिक वेतन या मानदेय देने की बात आती है तो आशाओं को स्वैच्छिक कार्यकर्ता बता दिया जाता है। सरकार ने शोषण करने का अद्भुत तरीका खोज निकाला है कि कोविड से लेकर पल्स पोलियो, टीकाकरण, मातृ शिशु सुरक्षा, सर्वे, गणना, परिवार नियोजन, मलेरिया, डेंगू की जागरूकता के लिए घर घर जाने तक सारे काम आशाओं से कराओ और वेतन की बात आते ही ‘सामाजिक कार्यकर्ता के नाम का सम्मान’ देकर इतिश्री कर लो। नए नए तरीके अपनाकर आशाओं का शोषण अब नहीं चलेगा, आशा वर्कर्स अपना अधिकार हासिल करके रहेंगी। धरना प्रदर्शन जुलूस कार्यक्रम में नैनीताल जिले के सभी ब्लॉकों की आशाएँ मौजूद रहीं। जिनमें दुर्गा टम्टा, मुन्नी बिष्ट, प्रेमा बृजवासी, भगवती बोरा, रिंकी जोशी, रीना बाला, मनीषा आर्य, भगवती बिष्ट, लीला, प्रीति रावत, सुमन बिष्ट, सरोज रावत, विमला उप्रेती, हेमा बिष्ट, चम्पा मेहता, अनिता, बबिता, सरिता कुरिया, भगवती शर्मा, रश्मि राणा, उमा भक्त, अनिता आर्य, इंदु ,जानकी, दीपा, शहनाज, कमरुन्निशा, माया टण्डन, प्रेमा, राधा नयाल, शोभा,रमा गैड़ा, अनुराधा, रेनू, सायमा सिद्दीकी, देवकी भट्ट, प्रेमा घुगत्याल, पुष्पा, हुमैरा, माया तिवारी, ममता पपनै, हेमा दरमवाल, कमला बिष्ट, हंसी बेलवाल, रश्मि, गीता नैनवाल, रुखसाना, चन्द्रा, हेमा, शाइस्ता खान सहित सैकड़ों की संख्या में आशा वर्कर्स मौजूद रहीं। आशाओं की माँगों के समर्थन में कुमाऊँ विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद सदस्य एडवोकेट कैलाश जोशी ने भी जिलाधिकारी कार्यालय के सम्मुख पहुँचकर आशाओं को संबोधित किया और समर्थन व्यक्त किया।


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