अंतिम चरण में ऐतिहासिक हिमालय संग्रहालय के जीणोंद्धार का कार्य

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मूल स्वरूप यथावत रखने को हैरिटेज विशेषज्ञ संस्था इनटैंक से लिया
सहयोग
चन्द्रेक बिष्ट,
नैनीताल। पर्यटन नगरी नैनीताल जहां अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए जग प्रसिद्ध है, वहीं नैनीताल ऐतिहासिक धरोंहरों का भी शहर है। यहां स्थिति ऐतिहासिक भवनों के संरक्षण के लिए एडीबी पर्यटन द्वारा क्रमबद्ध तरीके से इनका जीर्णोद्धार किया जा रहा है। इस क्रम में यहां डीएसबी परिसर स्थित वर्ष 1871 में बने हिमालय संग्रहालय भवन का जीर्णोद्धार कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। एडीबी पर्यटन के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक हिमालय संग्रहालय भवन का 32 लाख़ से जीर्णोद्धार कार्य किया गया है। पुराने एवं ऐतिहासिक भवन होने के कारण इनके जीर्णोद्धार कार्य में बेहद सावधानी बरतनी पड़ती है। इसके लिए हैरिटेज विशेषज्ञ संस्था इनटैक दिल्ली की मदद ली गई। इस इमारत के प्लैंथ वाल प्रोटक्शन, पुरानी टीप, छत बदलने व लैंड स्केपिंग का कार्य किया गया है। लैंड स्केपिंग का कार्य इन दिनों किया जा रहा है। मालूम हो कि नैनीताल के ऐतिहासिक भवनों के संरक्षण के लिए एशियन डवलपमेंट बैंक द्वारा बजट स्वीकृत किया गया है। नैनीताल के कई ऐतिहासिक भवनों का रखरखाव नहीं होने से यह भवन जीर्ण हो गये है। एडीबी पर्यटन द्वारा इन भवनों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। इन भवनों में सीआरएसटी कालेज, ताकुला गांधी मंदिर, बैंड स्टैड, सेंट जोन्स चर्च, कैथोलिक चर्च, लेक डैमवाल, हिमालय संग्रहालय भवन सहित कई अन्य भवनों का अंगीकरण किया गया। इसके अलावा शहर व आसपास के भवनों को चिहिन्त करने का कार्य भी किया जा रहा है। अंगीकृत किये गये भवनों का मूल स्वरूप न बदले इसके लिए हैरिटेज विशेषज्ञ संस्था इनटैंक से सहयोग लिया जा रहा है।
-हैरिटेज विशेष संस्था इनटैक दिल्ली की मदद ली
हिमालय संग्रहालय भवन का 32 लाख से जीर्णोद्धार कार्य किया गया है। पुराने एवं ऐतिहासिक भवन होने के कारण इनके जीर्णोद्धार कार्य में बेहद सावधानी बरतनी पड़ती है। इसके लिए हैरिटेज विशेष संस्था इनटैक दिल्ली की मदद ली गई। इस इमारत के प्लैंथ वाल प्रोटक्शन, पुरानी टीप, छत बदलने व लैंड स्केपिंग का कार्य किया गया है। कार्य अंतिम चरण में है। हरीश शर्मा, स्थलीय अभियंता एडीबी नैनीताल।

कभी अंग्रेजी स्कूल का चैपल था संग्रहालय
नैनीताल।
कुमाऊं विश्वविद्यालय डीएसबीपरिसर के इतिहास विभाग के अन्तर्गत आने वाला हिमालय संग्रहालय भवन 1871 में निर्मित किया गया। यहां डीएसबी परिसर में स्थित मिशनरी के अन्तर्गत चलने वाले वैलेजली गल्र्स कालेज का छोटा चर्च यानि चैपल था। संग्रहालय के प्रभारी डा. हीरा सिंह भाकुनी के अनुसार बाद में यह सम्पत्ति कुमाऊं के जाने माने मालदार दान बिष्ट ने खरीद ली। यह सम्पत्ति बाद में मालदार ने डिग्री कालेज के लिए भूमि दान दे दी। अब यह संग्रहालय डीएसबी परिसर की सम्पत्ति है।

One thought on “अंतिम चरण में ऐतिहासिक हिमालय संग्रहालय के जीणोंद्धार का कार्य

  1. very help full news ..thanku sir ..some topics is help full for comptetiv exams ..they topics are stiblised himalayn sangraalay nainital. 1871

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