Diwali 2020: कोरोना काल में पटाखों पर न दें जोर, सबसे बुरा है इसका शोर

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कोरोना काल में ज्योति पर्व दीपावली सचमुच जगमगाए, इसके लिए आतिशबाजी और पटाखों से दूरी बनानी जरूरी है। पिछले साल चंपावत जिले में आतिशबाजी की सामग्री के 105 लाइसेंस जारी हुए थे।

करीब दो करोड़ रुपये के पटाखे फोड़े गए। दीवाली में बम-पटाखे फोड़ने से चंपावत के नगरीय क्षेत्रों में वायु प्रदूषण में 15 फीसदी और ध्वनि प्रदूषण में 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई। लोगों का भी कहना है कि पटाखों के शोर से धूल और धुएं के अलावा कान, आंख और सांस की दिक्कत पैदा होती है। ऐसी ही स्थिति पिथौरागढ़ भी रही।

अमर उजाला की अपील

दीपावली भले ही अभी एक महीना दूर है, लेकिन हम अभी से पटाखा नहीं जलाने का मन बनाएंगे तो पटाखों की बिक्री करने वाली भी मांग के हिसाब से ही माल कम मंगाएंगे। इस खबर का मकसद सिर्फ आपको यह बताना है कि सांसों का दुश्मन कोरोना वायरस प्रदूषण में और भी सक्रिय हो जाएगा और पटाखों से निकला जानलेवा धुंआ आपके किसी अजीज के लिए ही घातक साबित होगा।

पटाखें इंसानी सेहत के लिए अनेक तरीकों से बेहद घातक हैं। सामान्य समय में भी इससे बचना चाहिए, लेकिन कोरोना काल में ये जानलेवा हो सकते हैं। इससे वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा में कमी आने से बच्चों, बुजुर्गों के अलावा सांस और एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए सबसे ज्यादा खतरा है। 
– डॉ. आरके जोशी, पीएमएस, जिला अस्पताल, चंपावत।

कोविड-19 में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और ज्यादा जरूरी है। अगर दशहरा-दीवाली में बम-पटाखों को फोड़ने पर लगाम नहीं लगी तो खतरनाक गैसों की मात्रा बढ़ जाएगी। इससे पर्यावरणीय संकट के साथ जन स्वास्थ्य पर भारी दुष्प्रभाव पड़ेगा। सांस संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी होगी। 

-डॉ. बीपी ओली, पर्यावरणविद, राजकीय डिग्री कॉलेज चंपावत।

दीपावली में पटाखों के जलने से पर्यावरण को काफी नुकसान होता है। लोगों से अनुरोध है कि इस बार कोरोना का कहर चरम पर है। पटाखे जलने से कोरोना काल में प्रदूषण ज्यादा बढ़ेगा। लोगों से अपील है कि इस बार दीप जलाकर दीपावली मनाएं। जितने पैसे के पटाखे फोड़ते हैं

उतने पैसे गरीब परिवारों को दें ताकि वह भी दीपावली का पर्व मना सकें। 

– शमशेर महर, अध्यक्ष व्यापार मंडल पिथौरागढ़।

पटाखों के जलने से प्रदूषण बढ़ता है। जिससे सांस के रोगियों को काफी दिक्कत है। कोरोना काल में पटाखे जलाना अधिक परेशानी पैदा कर सकता है। लोगों को इस बार सादगी से दीपावली मनानी चाहिए।

– पवन जोशी, अध्यक्ष जिला उद्योग व्यापार मंडल

इस दीपावली हमें पटाखों का बहिष्कार करना होगा ताकि कोरोना और उग्र नहीं हो पाए। इस बार प्रकृति ने सादगी पूर्व दीपावली बनाने के लिए मौका दिया है। हमें इस मौके को गंवाना नहीं चाहिए।

– हेम पंत, व्यापारी

प्रदूषण का स्तर बढ़ने से नई प्रकार की बीमारियां बढ़ रही हैं। इस दीवाली हमें पटाखों का पूर्ण बहिष्कार करना होगा।

-गोविंद चौहान, व्यापारी

कोरोना काल में ज्योति पर्व दीपावली सचमुच जगमगाए, इसके लिए आतिशबाजी और पटाखों से दूरी बनानी जरूरी है। पिछले साल चंपावत जिले में आतिशबाजी की सामग्री के 105 लाइसेंस जारी हुए थे।

करीब दो करोड़ रुपये के पटाखे फोड़े गए। दीवाली में बम-पटाखे फोड़ने से चंपावत के नगरीय क्षेत्रों में वायु प्रदूषण में 15 फीसदी और ध्वनि प्रदूषण में 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई। लोगों का भी कहना है कि पटाखों के शोर से धूल और धुएं के अलावा कान, आंख और सांस की दिक्कत पैदा होती है। ऐसी ही स्थिति पिथौरागढ़ भी रही।

अमर उजाला की अपील

दीपावली भले ही अभी एक महीना दूर है, लेकिन हम अभी से पटाखा नहीं जलाने का मन बनाएंगे तो पटाखों की बिक्री करने वाली भी मांग के हिसाब से ही माल कम मंगाएंगे। इस खबर का मकसद सिर्फ आपको यह बताना है कि सांसों का दुश्मन कोरोना वायरस प्रदूषण में और भी सक्रिय हो जाएगा और पटाखों से निकला जानलेवा धुंआ आपके किसी अजीज के लिए ही घातक साबित होगा।


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