Unlock 5.0 In Uttarakhand: 50 प्रतिशत से ज्यादा हाजिरी पर ही खुलेंगे प्राइवेट स्कूल

Spread the love


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

Updated Tue, 27 Oct 2020 10:44 PM IST

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर


कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें

हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कक्षाओं में 50 प्रतिशत से कम अटेंडेंस होने पर प्राइवेट स्कूल नहीं खुलेंगे। स्कूल खोलने की एसओपी पर चर्चा करते हुए प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन ने इसका फैसला लिया। उन्होंने एसओपी में कई खामियों का आरोप लगाते हुए सचिव शिक्षा डॉ आर मीनाक्षी सुंदरम  से उन्हें सुधारने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक इन खामियों को सुधारा नहीं जाता, स्कूल खोलना मुश्किल है।

मंगलवार को एसोसिएशन से जुड़े 51 प्राइवेट स्कूलों के संचालकों व प्रधानाचार्य की वर्चुअल बैठक में एसओपी के अलग-अलग बिंदुओं पर रायशुमारी हुई। एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम कश्यप ने कहा कि सभी स्कूल संचालकों ने 50 परसेंट से कम अटेंडेंस पर स्कूल चलाने में असमर्थता जताई है। उन्होंने स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई के फैसले पर भी नाराजगी जताई।

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड : प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापकों की होगी भर्ती, शिक्षा सचिव ने जारी किया आदेश

उन्होंने कहा कि हजारों मौतें हो चुकी हैं, जिनके लिए किसी डॉक्टर को दोषी नहीं ठहराया गया। ठीक इसी तरह स्कूल प्रबंधन को भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि दिन भर में 24 में से 18 घंटे बच्चा अपने अभिभावकों के साथ रहेगा। ऐसे में किसी भी तरह की खतरे के लिए स्कूलों को दोषी कैसे ठहराया जा सकता है, जहां बच्चा केवल छह घंटे रहेगा। 

उन्होंने आवासीय विद्यालयों से एफिडेविट मांगे जाने का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि सीईओ और जिला प्रशासन के प्रतिनिधि खोलने से पहले स्कूल का निरीक्षण करेंगे। ऐसे में एफिडेविट का कोई औचित्य नहीं रह जाता है।

इसके अलावा उन्होंने हॉस्टल में दो बेड के बीच में अस्थाई पार्टीशन के निर्देश को भी गलत बताया। उन्होंने कहा कि स्कूल दो बेड के बीच में पर्याप्त दूरी रख रहे हैं। केवल उन्हीं छात्रों व स्टाफ को एंट्री दी जाएगी, जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव होगी। ऐसे में पार्टीशन करने से बच्चा खुद को अकेला और तनाव में महसूस करेगा। 

उन्होंने आवासीय स्कूलों में सभी स्टाफ के लिए आवासीय व्यवस्था करने के फैसले को भी गलत बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्टाफ  का अपना परिवार और निजी जीवन भी है। बैठक में पीपीएसए अध्यक्ष प्रेम कश्यप, दून इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन डीएस मान, अमरजीत सिंह जुनेजा, रमेश बता, सोमदत त्यागी समेत अन्य मौजूद रहे।

पीपीएसए के अध्यक्ष प्रेम कश्यप ने कहा कि उत्तराखंड सरकार को हरियाणा से सीखना चाहिए। हरियाणा में भी दो नवंबर से स्कूल खुल रहे हैं। वहां की सरकार ने स्कूलों को अपने स्तर पर एसओपी बनाने के निर्देश दिए हैं। सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, सैनिटाइजर व अन्य सुरक्षा उपाय वहां भी स्कूलों को करने हैं।

लेकिन वहां किसी को जेल भेजने के लिए धमकाया नहीं जा रहा।  उत्तराखंड सरकार की एसओपी में साफ कहा गया है कि अगर संक्रमण हुआ तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा होगा। इसे तैयार करने से पहले स्कूल संचालकों और शिक्षाविदों की विश्वास में लिया जाना चाहिए था।

सार

  • प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन ने स्कूलों को खोलने की एसओपी पर की चर्चा
  • एसओपी में कई खामियों का लगाया आरोप
  • सचिव शिक्षा को पत्र लिखकर कहा-खामियों को सुधारे बिना स्कूल चलाना मुश्किल

विस्तार

हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कक्षाओं में 50 प्रतिशत से कम अटेंडेंस होने पर प्राइवेट स्कूल नहीं खुलेंगे। स्कूल खोलने की एसओपी पर चर्चा करते हुए प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन ने इसका फैसला लिया। उन्होंने एसओपी में कई खामियों का आरोप लगाते हुए सचिव शिक्षा डॉ आर मीनाक्षी सुंदरम  से उन्हें सुधारने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक इन खामियों को सुधारा नहीं जाता, स्कूल खोलना मुश्किल है।

मंगलवार को एसोसिएशन से जुड़े 51 प्राइवेट स्कूलों के संचालकों व प्रधानाचार्य की वर्चुअल बैठक में एसओपी के अलग-अलग बिंदुओं पर रायशुमारी हुई। एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम कश्यप ने कहा कि सभी स्कूल संचालकों ने 50 परसेंट से कम अटेंडेंस पर स्कूल चलाने में असमर्थता जताई है। उन्होंने स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई के फैसले पर भी नाराजगी जताई।

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड : प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापकों की होगी भर्ती, शिक्षा सचिव ने जारी किया आदेश

उन्होंने कहा कि हजारों मौतें हो चुकी हैं, जिनके लिए किसी डॉक्टर को दोषी नहीं ठहराया गया। ठीक इसी तरह स्कूल प्रबंधन को भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि दिन भर में 24 में से 18 घंटे बच्चा अपने अभिभावकों के साथ रहेगा। ऐसे में किसी भी तरह की खतरे के लिए स्कूलों को दोषी कैसे ठहराया जा सकता है, जहां बच्चा केवल छह घंटे रहेगा। 

उन्होंने आवासीय विद्यालयों से एफिडेविट मांगे जाने का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि सीईओ और जिला प्रशासन के प्रतिनिधि खोलने से पहले स्कूल का निरीक्षण करेंगे। ऐसे में एफिडेविट का कोई औचित्य नहीं रह जाता है।


आगे पढ़ें

हरियाणा से सीखे उत्तराखंड सरकार



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *