Coronavirus in Uttarakhand : बेसिक की ऑनलाइन पढ़ाई ठप, बोर्ड परीक्षा पर भी संकट 

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न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 30 Nov 2020 12:58 PM IST

प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : पीटीआई

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शासकीय व अशासकीय स्कूलों में कोरोना की बुरी मार पड़ी है। भले ही निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में भी ऑनलाइन कक्षाओं के जरिये पढ़ाई कराने के दावे किए जा रहे हों, मगर शासकीय व अशासकीय स्कूलों की प्राथमिक कक्षाओं की पढ़ाई लगभग चौपट नजर आ रही है। वहीं, दसवीं व बारहवीं बोर्ड के सैकड़ों छात्र परीक्षा फॉर्म नहीं भर सके हैं। उनकी परीक्षा पर भी संकट मंडराने लगा है। 

प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों का कहना है कि माध्यमिक कक्षाओं के बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं में जैसे-तैसे शामिल तो होते हैं, मगर प्राथमिक कक्षाओं के बच्चे ऑनलाइन कक्षा का लाभ नहीं ले पाते। इसका मुख्य कारण है कि अधिकांश बच्चे गरीब घरों के हैं।

ऐसे अधिकतर बच्चों के घर में स्मार्टफोन नहीं है। यदि किसी के घर में है भी तो उनके पिता या मां काम पर जाने के दौरान अपने साथ ले जाते हैं। हर स्कूल में औसतन 50 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे ऑनलाइन कक्षा से जुड़ नहीं पाते हैं। वहीं, आठ से ऊपर की कक्षाओं में भी उपस्थिति बेहद कम है। 

शिक्षकों ने भरी फीस, अब हस्ताक्षर कैसे कराएं

महेशानंद बहुगुणा इंटर कॉलेज, माजरा के वरिष्ठ शिक्षक एवं उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला महामंत्री अजय नौटियाल ने बताया कि 10 से 15 प्रतिशत छात्र बोर्ड परीक्षा के फॉर्म भरने ही नहीं आए। शिक्षकों ने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए खुद फीस जमा कराई है, लेकिन अब समस्या आ रही है कि फॉर्म में हस्ताक्षर व छात्र की फोटो लगानी है। इसके लिए छात्र को आना जरूरी है। अगर छात्र समय पर नहीं आए तो परीक्षा से वंचित होना पड़ेगा। 

शासकीय व अशासकीय स्कूलों में कुछ बच्चों के घर पर स्मार्टफोन नहीं हैं, जिस कारण ऑनलाइन क्लास में दिक्कतें आ रही हैं। ऐसे बच्चों के लिए दूरदर्शन में स्वयंप्रभा, ज्ञानदीप के माध्यम से कक्षाएं चलाई जा रही हैं। इसके बावजूद भी जो बच्चे लाभ लेने में असमर्थ हैं, उनके लिए शिक्षकों को निजी स्तर पर आवश्यक मदद करने को कहा गया है। इस दिशा में कई स्कूल सराहनीय कार्य भी कर रहे हैं। 
– आशारानी पैन्यूली, मुख्य शिक्षा अधिकारी

शासकीय व अशासकीय स्कूलों में कोरोना की बुरी मार पड़ी है। भले ही निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में भी ऑनलाइन कक्षाओं के जरिये पढ़ाई कराने के दावे किए जा रहे हों, मगर शासकीय व अशासकीय स्कूलों की प्राथमिक कक्षाओं की पढ़ाई लगभग चौपट नजर आ रही है। वहीं, दसवीं व बारहवीं बोर्ड के सैकड़ों छात्र परीक्षा फॉर्म नहीं भर सके हैं। उनकी परीक्षा पर भी संकट मंडराने लगा है। 

प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों का कहना है कि माध्यमिक कक्षाओं के बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं में जैसे-तैसे शामिल तो होते हैं, मगर प्राथमिक कक्षाओं के बच्चे ऑनलाइन कक्षा का लाभ नहीं ले पाते। इसका मुख्य कारण है कि अधिकांश बच्चे गरीब घरों के हैं।

ऐसे अधिकतर बच्चों के घर में स्मार्टफोन नहीं है। यदि किसी के घर में है भी तो उनके पिता या मां काम पर जाने के दौरान अपने साथ ले जाते हैं। हर स्कूल में औसतन 50 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे ऑनलाइन कक्षा से जुड़ नहीं पाते हैं। वहीं, आठ से ऊपर की कक्षाओं में भी उपस्थिति बेहद कम है। 

शिक्षकों ने भरी फीस, अब हस्ताक्षर कैसे कराएं

महेशानंद बहुगुणा इंटर कॉलेज, माजरा के वरिष्ठ शिक्षक एवं उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला महामंत्री अजय नौटियाल ने बताया कि 10 से 15 प्रतिशत छात्र बोर्ड परीक्षा के फॉर्म भरने ही नहीं आए। शिक्षकों ने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए खुद फीस जमा कराई है, लेकिन अब समस्या आ रही है कि फॉर्म में हस्ताक्षर व छात्र की फोटो लगानी है। इसके लिए छात्र को आना जरूरी है। अगर छात्र समय पर नहीं आए तो परीक्षा से वंचित होना पड़ेगा। 

शासकीय व अशासकीय स्कूलों में कुछ बच्चों के घर पर स्मार्टफोन नहीं हैं, जिस कारण ऑनलाइन क्लास में दिक्कतें आ रही हैं। ऐसे बच्चों के लिए दूरदर्शन में स्वयंप्रभा, ज्ञानदीप के माध्यम से कक्षाएं चलाई जा रही हैं। इसके बावजूद भी जो बच्चे लाभ लेने में असमर्थ हैं, उनके लिए शिक्षकों को निजी स्तर पर आवश्यक मदद करने को कहा गया है। इस दिशा में कई स्कूल सराहनीय कार्य भी कर रहे हैं। 
– आशारानी पैन्यूली, मुख्य शिक्षा अधिकारी



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