Haridwar Kumbh Mela 2021 : समुद्रमंथन से अमृत ही नहीं विष सहित निकले थे चौदह रत्न

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देवों और दानवों के बीच काल के सत्यखंड में हुए समुद्र मंथन में मृत्यु का कारक विष और अमरत्व प्रदान करने वाला अमृत ही नहीं, चौदह बहुमूल्य रत्न भी निकले थे। मंथन से निकले हलाहल का पान भगवान शंकर ने किया और नीलकंठ बन गए। अमृतपान कराते हुए मोहिनी रूपधारी विष्णु ने असुरों से छल किया। इस छल के परिणामस्वरूप धरती के चार स्थानों पर कुंभ के महापर्व पड़े। दुर्वासा ऋषि के शाप से देवता श्रीहीन हो गए और राक्षस उन पर भारी पड़ने लगे।



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