रविवार…सकारात्मक समाचार : उम्मीद न थी रिंकी मिल जाएगी, फिर अचानक आया फोन…

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उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जीटीबी एंक्लेव स्थित एक परिवार की इन दिनों खुशियों का ठिकाना नहीं है। हो भी क्यों न, 15 माह पूर्व लापता हुई 28 वर्षीय मनोरोगी बेटी इस परिवार को सकुशल मिल गई है। उसके लापता होने के बाद देश में लॉकडाउन लग गया था। परिजनों ने तो उसके जिंदा होने तक की उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन चेन्नई के एक एनजीओ ने जब परिवार को बेटी के सकुशल केरल में होने की जानकारी दी तो माता-पिता की खुशियों का ठिकाना न रहा।

जब वह केरल पुलिस को कोल्लम रेलवे स्टेशन पर मिली थी तो उन्होंने उसे एक संस्था के हवाले कर दिया था, जहां उसका उपचार कराया गया। स्वास्थ्य बेहतर हुआ तो एनजीओ ने युवती के परिजनों को दिल्ली में ढूंढ निकाला।

युवती के मामा नरेश ने बताया कि रिंकी कुमारी (28) परिवार के साथ ताहिरपुर, जीटीबी एंक्लेव इलाके में रहती है। परिवार में पिता राजेंद्र प्रसाद वर्मा, मां चिंता देवी और एक बड़ी बहन हैं। राजेंद्र प्रसाद इलाके में फल बेचते हैं। रिंकी ने 10वीं कक्षा पास की है। इस बीच उसे मनोरोग हो गया। परिजन उसका इलाज करा रहे थे।

29 नवंबर 2019 को अचानक रिंकी घर से लापता हो गई। काफी तलाश के बाद भी उसका पता नहीं चल सका। 30 नवंबर को जीटीबी एंक्लेव थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई। पुलिस ने भी रिंकी की तलाश की, लेकिन पता नहीं चल सका। इस बीच कोरोना संक्रमण बढ़ गया और मार्च में लॉकडाउन लग गया। कोरोना कॉल में दुकानें भी बंद हो गईं।

केरल पहुंच गई थी युवती
रिंकी घर से निकलने के बाद किसी तरह ट्रेन में सवार होकर केरल पहुंच गई। वह इधर-उधर मांगकर खाना खाती थी और कहीं भी सो जाती थी। 28 जनवरी 2020 को केरल के कोल्लम जिला में वनिता थाना पुलिस को रिंकी मिल गई। पुलिसकर्मियों ने उसकी हालत देखकर उसे एसएस समिथि अभया केंद्रम नामक एक संस्था में छोड़ दिया, जहां उसका इलाज कराया गया। 24 जुलाई को केरल की संस्था ने चेन्नई में मनोरोगियों को उनके परिजनों से मिलवाने एनजीओ एस्पाइरिंग लाइव्स से संपर्क किया। एनजीओ के मैनेजिंग ट्रस्टी मनीष कुमार ने रिंकी से बातचीत कर उससे थोड़ी बहुत जानकारी जुटाई।

जस्ट डायल से स्थानीय दुकानदार का नंबर लेकर परिजनों को खोजा
मनीष कुमार को रिंकी ने सिर्फ इतना बताया कि वह दिल्ली के ताहिरपुर की रहने वाली है। घर के पास एक लालबत्ती है। इसी आधार पर मनीष ने जस्ट डायल से ताहिरपुर में हार्डवेयर दुकानदार संजय बलदेव का मोबाइल नंबर लेकर उससे संपर्क किया। बलदेव को मनीष ने रिंकी की फोटो और जानकारी दी। बलदेव ने मेहनत कर रिंकी के परिजनों को ढूंढ निकाला और उनकी पीड़िता से बातचीत करा दी, लेकिन लॉकडाउन होने और ट्रक व फ्लाइट बंद होने के कारण रिंकी दिल्ली नहीं लाया जा सका। इस दौरान परिवार लगातार उससे वीडियो कॉल व फोन पर संपर्क में रहा।

26 फरवरी लाई गई दिल्ली
चैन्नई के एनजीओ ने रिंकी के पिता राजेंद्र प्रसाद व मामा नरेश समेत अन्य रिश्तेदारों का केरल जाने का इंतजाम किया। बाद में मनीष और एनजीओ की संस्थापक फरीहा सुमन केरल पहुंचीं। वहां औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रिंकी को 24 फरवरी को परिवार के हवाले कर दिया गया। 26 फरवरी को परिवार उसे लेकर दिल्ली पहुंचा तो मां की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिजन सभी का धन्यवाद करते नहीं थक रहे हैं।

दिल्ली पुलिस के लिए ढूंढना था मुश्किल
दिल्ली पुलिस के लिए शायद रिंकी का पता लगाना बेहद मुश्किल था। अमूमन, दिल्ली पुलिस जिपनेट (जोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क) के जरिये ही गुमशुदा लोगों का पता लगा पाती है। इसमें उत्तर भारतीय राज्य (दिल्ली, हरियाणा, यूपी, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और पंजाब) की पुलिस एक-दूसरे से जिपनेट के जरिये जानकारी साझा करती है। रिंकी केरल चली गई थी। इसलिए वह पुलिस के नेटवर्क से भी बाहर थी।



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